रंग दे बसंती चोला

 रंग दे बसन्ती चोला मां मेरा रंग दे बसन्ती चोला
 ऐसे बसन्ती चोले नू प्रताप ने जद अपनाया सी , तलवारों दे साये विचवी , गीत वतन दा गायासी 
ऐसे बसन्ती चोले नू उस वीर शिवाजी पाया सी
 जिसने कौम को गैरत खातिर दा जिन्दड़ी दा लाया सी रंग दे बसन्ती चोला ... 
ऐसे चोले नूं पावनवाली , रानी लक्ष्मीबाई सी 
जिसने सिर ते कफन बनके चुन्नी सिर तो लाई सी
 ऐसे बसन्ती चोले नूं अंग्र सत सिपाही लाया सी
 सवा लाख नाल एक लड़ा के गोविन्द नाम कहाया सी
 रंग दे बसन्ती चोला ...
 रल के आज कसम खाने हां , मौत तो ना घबरावांगे
 जान ते जे गल आजावेगी , जान वी दां ते लावांगे
 ऐसे बसंती चोले दा , जग वे विच मान वधावांगे , 
वीर शहीदां दी राह फड़ के अमर शहीदी पावांगे 
रंग दे बसन्ती.........

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